ahmed faraz shayari
Rizwan Ahmed रंजिश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ Ranjish hi sahi…
Rizwan Ahmed रंजिश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ Ranjish hi sahi…
मुकर गया वो चाहतों से आदतें खराब कर के मेरी। Mukar gaya wo chahaton se aadaten kharab …
महंगे कपड़े सस्ते लोग भाड़ में जाएं ऐसे लोग। Mahnge kapde saste log bhaad mei jayen ais…
एक लाइन जो सबसे ज्यादा डराती है मेरा यकीन तो करो मैं तुम्हारे साथ हूँ.!
मैं कैसे मान लूं के कोई मेरा नही रहा जब तक खुदा की ज़ात है तन्हा नही हूँ मैं.!
जिसके लिए हमने तमाम हदें तोड़ दीं आज वो भी कहता है हद में रहा करो.!