Nadan Insan Hindi Shayari
वो गूंगे बहरों की भी सुनता है, वो कीड़े मकोड़ों की भी ज़रूरतें पूरी करता है नादान इंसान अपने रब को जा…
वो गूंगे बहरों की भी सुनता है, वो कीड़े मकोड़ों की भी ज़रूरतें पूरी करता है नादान इंसान अपने रब को जा…
Tujhe ab bhi apna samajhte hain hum nadan hain ye kiya sajahte hain hum''