Homekhwab shayari khwab hindi shayari www.lekhta.com August 31, 2020 0 महक जाती हैं गलियां जब जनाब हमारे गुज़रते थे कुछ दिन पहले तक हमारी आंखों से कैसे ख्वाब गुज़रते थे.!(रिज़वान) You Might Like View all
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